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पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤²
पà¥à¤°à¤¸à¥‚तिपूरà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤² (Prenatal care) सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की à¤à¤• निरोधक देखà¤à¤¾à¤² है। इसके अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त अनेक गतिविधियाठआतीं हैं, जैसे सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ परीकà¥à¤·à¤£, सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवनशैली से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ सà¥à¤à¤¾à¤µ, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में होने वाले शारीरिक परिवरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ जानकारी देना, जनà¥à¤®à¤ªà¥‚रà¥à¤µ पोषण (विटामिन आदि की जानकारी), आदि। पà¥à¤°à¤¸à¥‚तिपूरà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤² से अनेक लाठहोते हैं, जैसे गरà¥à¤à¤¿à¤£à¥€ की मृतà¥à¤¯à¥ से बचाव, गरà¥à¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ से बचाव, जनà¥à¤® के समय कम à¤à¤¾à¤°, आदि से बचाव।
उचà¥à¤š आय वाले देशों में परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤—त रूप से निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित कारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥‚तिपूरà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤² के अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—त आते हैं-
पà¥à¤°à¤¥à¤® सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से लेकर २८वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक हर माह डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलना
२८वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से ३६वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक हर १५ दिन बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाना
३६वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद से पà¥à¤°à¤¸à¤µ तक हर सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाना
अनà¥à¤•à¥à¤°à¤®
1 पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤²
1.1 पहली तिमाही
1.2 दूसरी तिमाही
1.3 तीसरी तिमाही
1.4 पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ रिकॉरà¥à¤¡
1.5 चितà¥à¤°à¤£ (इमेजिंग)
1.6 जटिलताà¤à¤‚ और आपातकालीन परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
1.7 à¤à¥à¤°à¥‚ण आकलन
2 शिशà¥-जनà¥à¤®
2.1 पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£
2.2 पà¥à¤°à¤¸à¤µ
3 पà¥à¤°à¤¸à¤µ पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥
4 वेतन
5 इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ देखें
6 सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤
7 आगे पढ़ें
8 बाहरी कड़ियाà¤
पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤²
यह लेख सूची के रूप में है। इसे गदà¥à¤¯ के रूप में बेहतर दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¤¾ जा सकता है। कृपया इसे सूची से गदà¥à¤¯ रूप में ढाल कर इसे बेहतर बनाने में मदद करें। (मारà¥à¤š 2009)
मà¥à¤–à¥à¤¯ लेख: पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤²
पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ देखà¤à¤¾à¤², गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ जटिलताओं की जांच के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है। इसके लिठशारीरिक और नियमित पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के लिठनियमित रूप से परीकà¥à¤·à¤£ सà¥à¤¥à¤² जाना पड़ता है:
[5] à¤à¥à¤°à¥‚ण (लगà¤à¤— 14 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ गरà¥à¤à¤•ालीन उमà¥à¤°) का 3डी अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड
[5] à¤à¥à¤°à¥‚ण (लगà¤à¤— 14 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ गरà¥à¤à¤•ालीन उमà¥à¤°) का 3डी अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड
17 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ का à¤à¥à¤°à¥‚ण
17 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ का à¤à¥à¤°à¥‚ण
20 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ का à¤à¥à¤°à¥‚ण
20 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ का à¤à¥à¤°à¥‚ण
पहली तिमाही
पूरà¥à¤£ रकà¥à¤¤ गणना (कमà¥à¤ªà¥à¤²à¥€à¤Ÿ बà¥à¤²à¤¡ काउंट) (सीबीसी (CBC))
रकà¥à¤¤ का पà¥à¤°à¤•ार (बà¥à¤²à¤¡ टाइप)
à¤à¤šà¤¡à¥€à¤à¤¨ (HDN) के लिठसामानà¥à¤¯ रोग-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ारक की जांच (अपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· कूमà¥à¤¬à¥à¤¸ परीकà¥à¤·à¤£)
आरà¤à¤š डी (Rh D) नकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ रोगियों को आरà¤à¤š (Rh) रोग की रोकथाम करने के लिठ28 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में रोगैम (RhoGam) लेना चाहिà¤à¥¤
दà¥à¤°à¥à¤¤ पà¥à¤²à¤¾à¤œà¥à¤®à¤¾ अà¤à¤¿à¤•रà¥à¤®à¤• (आरपीआर (RPR)) जो उपदंश की जांच करता है
रूबेला रोगपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ारक जांच
हेपटाइटिस बी सतह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤œà¤¨
सूजाक और कà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ संवरà¥à¤§
तपेदिक (टीबी) के लिठपीपीडी (PPD)
पैप सà¥à¤®à¥€à¤¯à¤°
मूतà¥à¤°-विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ और संवरà¥à¤§
à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ (HIV) की जांच
गà¥à¤°à¥à¤ª बी गोलाणॠकी जांच - सकारातà¥à¤®à¤• होने पर आइवी पेनिसिलिन (IV penicillin) या à¤à¤®à¥à¤ªà¥€à¤¸à¤¿à¤²à¥€à¤¨ (यह बहà¥à¤¤ ससà¥à¤¤à¤¾ होता है और यह कई जगह उपलबà¥à¤§ होता है) दिया जाà¤à¤—ा (यदि माता को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती हो तो वैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤¾ के रूप में आइवी कà¥à¤²à¤¿à¤‚डामाइसिन (IV clindamycin) और आइवी वैंकोमाइसिन (IV vancomycin) दिया जाता है)
डाउंस सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (तà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ 21) और तà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ 18 की आनà¥à¤µà¤‚शिक जांच आम तौर पर 16-18 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ की अवधि वाली दूसरी तिमाही में किया जाने वाले डाउंस सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® की à¤à¤à¤«à¤ªà¥€-कà¥à¤µà¥ˆà¤¡ (AFP-Quad) जांच से संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका में राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ मानक बड़ी तेज़ी से विकास हो रहा है। à¤à¥à¤°à¥‚ण की गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ (मोटी तà¥à¤µà¤šà¤¾ ठीक नहीं होती है) और दो रसायन (विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¥à¤¯ पदारà¥à¤¥) पैप-ठ(Papp-a) और बीà¤à¤šà¤¸à¥€à¤œà¥€ (bhcg) (सà¥à¤µà¤¯à¤‚ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ सà¥à¤¤à¤°) के अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड के साथ 10 से 13 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद नवीन à¤à¤•ीकृत जांच (जिसे पहले फासà¥à¤Ÿà¤° (F.A.S.T.E.R) कहा जाता था, जो फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ à¤à¤£à¥à¤¡ सेकणà¥à¤¡ टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤° अरà¥à¤²à¥€ रिज़लà¥à¤Ÿà¥à¤¸ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ पहली और दूसरी तिमाही के आरंà¤à¤¿à¤• परिणाम का संकà¥à¤·à¤¿à¤ª रूप है) की जा सकती है। यह बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦ à¤à¤• सटीक जोखिम पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¼à¤¾à¤‡à¤² पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है। उसके बाद 15 से 20 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में दूसरी बार खून की जांच की जाती है जिससे जोखिम के बारे में और अधिक सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ जानकारी पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है। अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड और दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ रकà¥à¤¤ परीकà¥à¤·à¤£ की वजह से इसका खरà¥à¤š, à¤à¤à¤«à¤ªà¥€-कà¥à¤µà¥ˆà¤¡ जांच से अधिक होता है लेकिन देखा गया है कि इसके पीछे खरà¥à¤š करने की दर 92% है।
दूसरी तिमाही
à¤à¤®à¤à¤¸à¤à¤à¤«à¤ªà¥€/कà¥à¤µà¥ˆà¤¡ (MSAFP/quad) जांच (à¤à¤• साथ चार बार खून की जांच) (मातृ सीरम अलà¥à¤«à¤¾-à¤à¥à¤°à¥‚णपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨; इनहिबिन; à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‰à¤²; बीà¤à¤šà¤¸à¥€à¤œà¥€ या मà¥à¤«à¥à¤¤ बीà¤à¤šà¤¸à¥€à¤œà¥€) - उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨, कम संखà¥à¤¯à¤¾ या विषम पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ जो तà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ 18 या तà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ 21 के बढ़े हà¥à¤ जोखिम और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा नली दोष के जोखिम से सहसमà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ है
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾, गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤², तरल पदारà¥à¤¥ और बचà¥à¤šà¥‡ का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन करने के लिठपेट या पारयोनि का अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड
उलà¥à¤µà¤µà¥‡à¤§à¤¨ (गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की जांच) उन महिलाओं के लिठराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ मानक है जिनकी उमà¥à¤° 35 से अधिक है या जो मधà¥à¤¯ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ तक 35 की हो जाती हैं या जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पारिवारिक इतिहास या जनà¥à¤® पूरà¥à¤µ इतिहास की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खतरा होता है।
तीसरी तिमाही
लोहितकोशिकामापी (दिठहà¥à¤ रकà¥à¤¤ में लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं की आयतन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤à¤¤à¤¾) (कम होने पर माता को लौह अनà¥à¤ªà¥‚रण दिया जाà¤à¤—ा)
गà¥à¤²à¥‚कोज़ à¤à¤°à¤£ परीकà¥à¤·à¤£ (जीà¤à¤²à¤Ÿà¥€ (GLT)) - गरà¥à¤à¤•ालीन मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ की जांच; 140 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ डेसीलिटर से अधिक होने पर गà¥à¤²à¥‚कोज़ सहिषà¥à¤£à¥à¤¤à¤¾ परीकà¥à¤·à¤£ (जीटीटी (GTT)) किया जाता है; गà¥à¤²à¥‚कोज़ की मातà¥à¤°à¤¾ 105 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ डेसीलिटर से अधिक होने पर गरà¥à¤à¤•ालीन मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ होने का संकेत मिलता है।
अधिकांश डॉकà¥à¤Ÿà¤° कोला, नींबू या संतरे में 50 गà¥à¤°à¤¾à¤® गà¥à¤²à¥‚कोज़ के à¤à¤• पेय के रूप में सà¥à¤—र (शरà¥à¤•रा) à¤à¤°à¤¤à¥‡ हैं और à¤à¤• घंटे (5 मिनट आगे या पीछे) बाद रकà¥à¤¤ निकालते हैं; 1980 के दशक के अंतिम दौर के बाद से मानक संशोधित मानदंड को कम करके 135 कर दिया गया है
पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ रिकॉरà¥à¤¡
पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति-विशेषजà¥à¤ž या पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति-सहायिका से पहली मà¥à¤²à¤¾à¤•़ात के समय गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ रिकॉरà¥à¤¡ को साथ लाने के लिठकहा जाता है, जिसमें उसकी चिकितà¥à¤¸à¤¾ का इतिहास और शारीरिक परीकà¥à¤·à¤¾ की रिपोरà¥à¤Ÿ शामिल रहती है। उसके बाद जितनी बार वह डॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलने जाती है, उतनी बार उसके गरà¥à¤ की आयॠकी जांच की जाती है।
सिमà¥à¤«à¤¾à¤‡à¤¸à¤¿à¤¸-फंडल हाईट या असà¥à¤¥à¤¿à¤¸à¤‚योजिका-बà¥à¤§à¥â€à¤¨à¤ªà¤°à¤• ऊंचाई (जिसे संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में à¤à¤¸à¤à¤«à¤à¤š या SFH कहा जाता है और सेंटीमीटर में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किया जाता है), गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ के 20 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ बाद गरà¥à¤ की आयॠके बराबर होनी चाहिठऔर à¤à¥à¤°à¥‚ण की वृदà¥à¤§à¤¿ को पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ मà¥à¤²à¤¾à¤•़ात के दौरान à¤à¤• वकà¥à¤° पर दरà¥à¤¶à¤¾à¤¨à¤¾ चाहिà¤à¥¤ गरà¥à¤ के अनà¥à¤¦à¤° के बचà¥à¤šà¥‡ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का पता लगाने के लिठपà¥à¤°à¤¸à¥‚ति-सहायिका या पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति-विशेषजà¥à¤ž, लियोपोलà¥à¤¡ कौशल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करके छूकर बचà¥à¤šà¥‡ का परीकà¥à¤·à¤£ करते हैं। रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª पर à¤à¥€ नज़र रखी जानी चाहिठजो सामानà¥à¤¯ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ में 140/90 तक हो सकता है। उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª (हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°) से अतिरकà¥à¤¤à¤¦à¤¾à¤¬ (हाइपरटेंशन) का संकेत मिलता है और अगर गंà¤à¥€à¤° सूजन (à¤à¤¡à¥€à¤®à¤¾ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ शोफ़ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ पानी वाला सूजन) होती है और पेशाब के माधà¥à¤¯à¤® से पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¥€ निकलता है, तो शायद पूरà¥à¤µ-पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤¾à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª होने का à¤à¥€ संकेत मिलता है।
à¤à¥à¤°à¥‚ण की जीवन-कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ के साथ-साथ जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के आकलन में मदद करने के लिठà¤à¥à¤°à¥‚ण की जांच à¤à¥€ की जाती है। आनà¥à¤µà¤‚शिक दशा वाले शिशॠका धारण करने में जिन परिवारों को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खतरा होने की समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है, उन परिवारों को अकà¥à¤¸à¤° आनà¥à¤µà¤‚शिक परामरà¥à¤¶ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाता है। à¤à¥à¤°à¥‚ण में डाउंस सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® और अनà¥à¤¯ गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤° असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं की जांच करने के लिठ35 या उससे अधिक उमà¥à¤° की महिलाओं के लिठकà¤à¥€-कà¤à¥€ 20 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के आसपास उलà¥à¤µà¤µà¥‡à¤§à¤¨ किया जाता है।
उलà¥à¤µà¤µà¥‡à¤§à¤¨ करने से à¤à¥€ पहले डाउन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® जैसे विकारों की जांच करने के लिठà¤à¥€ माता को तà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤£ परीकà¥à¤·à¤£, पशà¥à¤šà¤—à¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ की जांच, नाक की हडà¥à¤¡à¥€, अलà¥à¤«à¤¾-à¤à¥à¤°à¥‚णपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की जांच और जरायà¥à¤—त अंकà¥à¤° नमूना लेना जैसे परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ पड़ सकता है। उलà¥à¤µà¤µà¥‡à¤§à¤¨, à¤à¥à¤°à¥‚ण की à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ आनà¥à¤µà¤‚शिक जांच है, जिसके तहत गरà¥à¤à¥‹à¤¦à¤• से à¤à¥à¤°à¥‚ण के डीà¤à¤¨à¤ (DNA) निकालने के लिठमाता के पेट की दीवार और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की दीवार में à¤à¤• सà¥à¤ˆ घà¥à¤¸à¤¾à¤¯à¤¾ जाता है। इस उलà¥à¤µà¤µà¥‡à¤§à¤¨ की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ और à¤à¥à¤°à¥‚ण की कà¥à¤·à¤¤à¤¿ होने का खतरा रहता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके तहत शिशॠधारित गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का वेधन किया जाता है।
12 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में किया गया डेटिंग सà¥à¤•ैन.
चितà¥à¤°à¤£ या इमेजिंग, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की निगरानी करने का à¤à¤• और महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ तरीका है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही में à¤à¥€ आम तौर पर माता और à¤à¥à¤°à¥‚ण का चितà¥à¤° लिया जाता है। à¤à¤¸à¤¾ माता से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं की à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤£à¥€ करने के लिà¤, गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के अनà¥à¤¦à¤° गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करने के लिà¤, गरà¥à¤ की आयॠका अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाने के लिà¤, à¤à¥à¤°à¥‚णों और गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² की संखà¥à¤¯à¤¾ का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने के लिà¤, असà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¿à¤• गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ और पहली तिमाही के रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन करने के लिठऔर विसंगतियों के आरंà¤à¤¿à¤• लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का आकलन करने के लिठकिया जाता है।
आयनकारी विकिरण की वजह से, विशेष रूप से पहली तिमाही में, à¤à¤•à¥à¤¸-रे और कंपà¥à¤¯à¥‚टरीकृत टोमोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ (सीटी (CT)) का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— नहीं किया जाता है, जिसका à¤à¥à¤°à¥‚ण पर टेराटोजेनिक असर पड़ता है। à¤à¥à¤°à¥‚ण पर मैगà¥à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• रेज़ोनंस इमेजिंग या चà¥à¤‚बकीय अनà¥à¤¨à¤¾à¤¦ चितà¥à¤°à¤£ (à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ (MRI)) का कोई पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ नहीं देखा गया है,[1] लेकिन यह तकनीक नियमित अवलोकन के लिठकाफी महंगी है। इसके बजाय, पहली तिमाही में और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के शà¥à¤°à¥‚ से अंत तक चितà¥à¤°à¤£ विकलà¥à¤ª के रूप में अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड का सहारा लिया जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे कोई विकिरण नहीं निकलता है, इसे उठाकर ले जाया जा सकता है और वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• समय के चितà¥à¤°à¤£ की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ उपलबà¥à¤§ कराता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान किसी à¤à¥€ समय अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड इमेजिंग किया जा सकता है, लेकिन इसका पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— आमतौर पर 12वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ (कालनिरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£à¤•ारी जांच) और 20वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ (विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ जांच) में किया जाता है।
à¤à¤• सामानà¥à¤¯ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£à¤•ाल में à¤à¤• गरà¥à¤ थैली, पीतक थैली और à¤à¥à¤°à¥‚णीय सà¥à¤¤à¤®à¥à¤ दिखाई देगा। छठीं सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ से पहले मीन जेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¤² सिक डायमीटर या औसत गरà¥à¤ थैली वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ (à¤à¤®à¤œà¥€à¤¡à¥€ (MGD)) और छठीं सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद कà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨-रमà¥à¤ª लेंथ या शीरà¥à¤· से पà¥à¤Ÿà¥à¤ े तक की लंबाई का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन करके गरà¥à¤ की आयॠका आकलन किया जा सकता है। à¤à¤•ाधिक गरà¥à¤ का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन मौजूद गरà¥à¤à¥‹à¤¦à¤• थैलियों और गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²à¥‹à¤‚ की संखà¥à¤¯à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाता है।
जटिलताà¤à¤‚ और आपातकालीन परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
यह section सूची के रूप में है। इसे गदà¥à¤¯ के रूप में बेहतर दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¤¾ जा सकता है। कृपया इसे सूची से गदà¥à¤¯ रूप में ढाल कर इसे बेहतर बनाने में मदद करें। (मई 2010)
पà¥à¤°à¤®à¥à¤– आपातकालीन परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में शामिल हैं:
असà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¿à¤• गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ (à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—नैनà¥à¤¸à¥€) उस अवसà¥à¤¥à¤¾ का नाम है जब फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब में या (शायद ही कà¤à¥€) अंडाशय पर या पेरिटोनियल कैविटी के अनà¥à¤¦à¤° à¤à¤• à¤à¥à¤°à¥‚ण का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤£ किया जाता है। इससे बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ आंतरिक रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ हो सकता है।
पूरà¥à¤µ-पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤¾à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª (पà¥à¤°à¤¿-इकà¥à¤²à¥ˆà¤®à¥à¤ªà¤¸à¤¿à¤¯à¤¾) जो à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ रोग है जिसे मातृतà¥à¤µ अतिरकà¥à¤¤à¤¦à¤¾à¤¬ से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ संकेतों और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ किया जाता है। इसका कारण मालूम नहीं है और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के आरंà¤à¤¿à¤• चरणों से इसके विकास की à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤£à¥€ करने के लिठमारà¥à¤•रों की मांग की जा रही है। कà¥à¤› अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ कारकों की वजह से अनà¥à¤¤à¤ƒà¤•ला (à¤à¤‚डोथीलियम) में संवहनी कà¥à¤·à¤¤à¤¿ का सामना करना पड़ता है जिससे अतिरकà¥à¤¤à¤¦à¤¾à¤¬ का समसà¥à¤¯à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाती है। गंà¤à¥€à¤° होने में यह पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤¾à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª का रूप धारण कर लेता है जिसके तहत आकà¥à¤·à¥‡à¤ª (पेशी-सà¥à¤«à¥à¤°à¤£ के साथ बेहोशी और à¤à¤‚ठन) आते हैं जो घातक हो सकता है। हेलà¥à¤ª सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (HELLP syndrome) वाले पूरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¸à¤µà¤¾à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ªà¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ रोगियों में यकृत विफलता (लीवर फेलà¥à¤¯à¥‹à¤°) और डिसेमिनेटेड इंटà¥à¤°à¤¾à¤µà¥ˆà¤¸à¥à¤•à¥à¤¯à¥‚लर कोà¤à¤—à¥à¤²à¥‡à¤¶à¤¨ या पà¥à¤°à¤¸à¥ƒà¤¤ अंतरà¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤•ी सà¥à¤•ंदन (डीआईसी (DIC)) की समसà¥à¤¯à¤¾ दिखाई देती है।
गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² पृथकà¥à¤•रण (पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टल à¤à¤¬à¥à¤°à¤ªà¥à¤¶à¤¨) जिसका उचित पà¥à¤°à¤¬à¤¨à¥à¤§ नहीं करने पर खून निकलते रहने से रोगी की मौत हो सकती है।
à¤à¥à¤°à¥‚ण वेदना (फेटल डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸) जहां गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯à¤¿à¤• वातावरण में à¤à¥à¤°à¥‚ण की कà¥à¤·à¤¤à¤¿ हो रही होती है।
सà¥à¤•ंधीय कषà¥à¤Ÿà¤•ारी पà¥à¤°à¤¸à¤µ (शोलà¥à¤¡à¤° डिसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾) जहां योनि के माधà¥à¤¯à¤® से होने वाले पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान à¤à¥à¤°à¥‚ण का à¤à¤• कनà¥à¤§à¤¾ अटक जाता है, à¤à¤¸à¤¾ विशेष रूप से मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ माताओं के अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• बड़े शरीर वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ होता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯à¤¿à¤• विदारण (यूटेरिन रपà¥à¤šà¤°) जो कषà¥à¤Ÿà¤•ारी पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान हो सकता है जिससे à¤à¥à¤°à¥‚ण और माता के जीवन को खतरे में डाल देता है।
à¤à¥à¤°à¤‚शित रजà¥à¤œà¥ (पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤ªà¥à¤¸à¥à¤¡ कॉरà¥à¤¡) जो à¤à¥à¤°à¥‚ण के घà¥à¤Ÿà¤¨ के जोखिम के साथ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान à¤à¥à¤°à¥‚ण के रजà¥à¤œà¥ के à¤à¥à¤°à¤‚श को संदरà¥à¤à¤¿à¤¤ करता है।
पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤µà¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ (ऑबà¥à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤•ल हेमरेज) जिसके होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे - समà¥à¤®à¥à¤–ी गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² (पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा पà¥à¤°à¥€à¤µà¤¿à¤¯à¤¾), गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯à¤¿à¤• अशà¥à¤°à¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ विदारण (यूटेरिन रपà¥à¤šà¤° ऑफ़ टियरà¥à¤¸), गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯à¤¿à¤• कमजोरी (यूटेरिन à¤à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥€), यथावत गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² या गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²à¤¿à¤• अंश, या रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ विकार.
पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¥‚तिक पूतिता (पà¥à¤¯à¥‚रपीरल सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸) जो पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान या पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का à¤à¤• विकसित संकà¥à¤°à¤®à¤£ है।
à¤à¥à¤°à¥‚ण आकलन
à¤à¥à¤°à¥‚ण के आकार से गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के गरà¥à¤à¤•ालीन आयॠका निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने के लिठअलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड का नियमित पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है, सबसे सटीक तिथि-निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ à¤à¥à¤°à¥‚ण के विकास पर महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ रूप से अनà¥à¤¯ कारकों का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ने से पहले पहली तिमाही में होता है। अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² आनà¥à¤µà¤‚शिक विसंगतियों (या अनà¥à¤¯ à¤à¥à¤°à¥‚णीय विसंगतियों) का पता लगाने और बायोफिज़िकल पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¾à¤‡à¤²à¥‹à¤‚ या जैवशारीरिक रूपरेखाओं (बीपीपी (BPP)) का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने के लिठà¤à¥€ किया जाता है, जिसका पता आम तौर पर दूसरी तिमाही में आसानी से किया जाता है जब à¤à¥à¤°à¥‚णीय संरचनाà¤à¤‚ पहले से बड़ी और अधिक विकसित होती हैं। विशेष पà¥à¤°à¤•ार के अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड उपकरणों से नाà¤à¥à¤¯ धमनी में कम/अनà¥à¤ªà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤/विपरीत या अनà¥à¤¶à¤¿à¤¥à¤¿à¤²à¤• रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ का पता लगाने के लिठनाà¤à¥à¤¯ रजà¥à¤œà¥ में रकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ वेग का à¤à¥€ मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन किया जा सकता है।
मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किठजाने वाले अनà¥à¤¯ साधनों में शामिल हैं:
आनà¥à¤µà¤‚शिक बीमारियों की जांच करने के लिठà¤à¥à¤°à¥‚णीय कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ (फेटल केरियोटाइप) का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। इसे उलà¥à¤µà¤µà¥‡à¤§à¤¨ या कोरियोनिक विलस सैमà¥à¤ªà¤²à¤¿à¤‚ग अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ जरायà¥à¤—त अंकà¥à¤° नमूना (सीवीà¤à¤¸ (CVS)) के माधà¥à¤¯à¤® से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया जा सकता है।
à¤à¥à¤°à¥‚णीय रकà¥à¤¤à¤¾à¤²à¥à¤ªà¤¤à¤¾ (फेटल à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾), आरà¤à¤š आइसोइमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¾à¤‡à¤œà¤¼à¥‡à¤¶à¤¨ (Rh isoimmunization), या हाईडà¥à¤°à¥‰à¤ªà¥à¤¸ (hydrops) के मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन के लिठà¤à¥à¤°à¥‚ण की लोहितकोशिकामापी का निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ परà¥à¤•à¥à¤¯à¥‚टेनियस अमà¥à¤¬à¤¿à¤²à¤¿à¤•ल बà¥à¤²à¤¡ सैमà¥à¤ªà¤²à¤¿à¤‚ग (पबà¥à¤¸ (PUBS)) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जा सकता है जिसे गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में पेट के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤• सà¥à¤ˆ घà¥à¤¸à¤¾à¤•र और नाà¤à¥à¤¯ रजà¥à¤œà¥ का à¤à¤• अंश निकालकर किया जाता है।
à¤à¥à¤°à¥‚ण के फेफड़ों की परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ इस बात से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है कि à¤à¥à¤°à¥‚ण कितना पृषà¥â€à¤ सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤•ारक का उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कर रहा है। पृषà¥â€à¤ सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤•ारक के कम उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ से फेफड़े की कम परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ का संकेत मिलता है और यह शिशॠशà¥à¤µà¤¾à¤¸ कषà¥à¤Ÿ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® का à¤à¤• अति जोखिमपूरà¥à¤£ कारक है। आम तौर पर 1.5 से अधिक लेसिथिन:सà¥à¤«à¤¿à¤‚गोमायलिन अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤, फेफड़े की अधिक परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ होता है।
à¤à¥à¤°à¥‚णीय हृदय गति के लिठनॉन सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ (à¤à¤¨à¤à¤¸à¤Ÿà¥€ (NST))
ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ चैलेनà¥à¤œ टेसà¥à¤Ÿ
शिशà¥-जनà¥à¤®
पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£
पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£, à¤à¤• महिला में कृतà¥à¤°à¤¿à¤® रूप से या समय से पहले पà¥à¤°à¤¸à¤µ को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करने की à¤à¤• विधि है। पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करने के कारणों में पूरà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¸à¤µà¤¾à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª, जनà¥à¤® समूह, मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ और अनà¥à¤¯ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सामानà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ हालत, जैसे - गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की बीमारी शामिल हो सकते हैं। यदि à¤à¥à¤°à¥‚ण या माता का जोखिम फेफड़े की परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ की परवाह किठबिना समय से पहले à¤à¥à¤°à¥‚ण के पà¥à¤°à¤¸à¤µ के जोखिम से अधिक होता है तो गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ के 34 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद कà¤à¥€ à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£ किया जा सकता है। यदि कोई महिला अंत में 41-42 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® नहीं देती है, तो उसे पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² इस तारीख के बाद असà¥à¤¥à¤¿à¤° हो सकता है।[कृपया उदà¥à¤§à¤°à¤£ जोड़ें]
कई तरीकों से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है:
पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ कà¥à¤°à¥€à¤®, पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤²à¥ˆà¤‚डीन E2 का पेसारी
अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤¨à¤¿ या मà¥à¤‚ह में मिसोपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤² देना
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ में à¤à¤• 30-à¤à¤®à¤à¤² फोली कैथेटर को
पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करना
गरà¥à¤à¥‹à¤¦à¤• à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¤¿à¤“ं का विदारण
सिंथेटिक ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ (पिटोसिन या सिंटोसिनोन) को अंतःशिरा में लगाना
पà¥à¤°à¤¸à¤µ
खà¥à¤¦ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान, पà¥à¤°à¤¸à¥‚ति-विशेषजà¥à¤ž या डॉकà¥à¤Ÿà¤° या निवासी चिकितà¥à¤¸à¤• या परà¥à¤¯à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£à¤¾à¤§à¥€à¤¨ मेडिकल छातà¥à¤° को असंखà¥à¤¯ कारà¥à¤¯ करने के लिठबà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ जा सकता है। इन कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में निमà¥à¤¨ कारà¥à¤¯ शामिल हो सकते हैं:
नरà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग चारà¥à¤Ÿ की समीकà¥à¤·à¤¾ करके, योनि की परीकà¥à¤·à¤¾ करके और à¤à¥à¤°à¥‚णीय निगरानी उपकरण (कारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¥‹à¤•ोगà¥à¤°à¤¾à¤«) से मिले सà¥à¤°à¤¾à¤— का आकलन करके पà¥à¤°à¤¸à¤µ की पà¥à¤°à¤—ति की निगरानी करना
हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करके पà¥à¤°à¤¸à¤µ की पà¥à¤°à¤—ति को तेज करना
संवेदनाहारकों, किसी संवेदनाहरण-विशेषजà¥à¤ž या किसी नरà¥à¤¸ à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ या तो नाइटà¥à¤°à¤¸ ऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡, पीड़ाहारी या निदà¥à¤°à¤¾à¤•ारी दवाओं, या उपरिदृढ़तानिक संजà¥à¤žà¤¾à¤¹à¤°à¤£ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करके दरà¥à¤¦ से राहत दिलाना
संदंश या वेंटूज़ (à¤à¥à¤°à¥‚ण के सिर पर लगाया जाने वाला à¤à¤• चूषण टोपी) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ ढ़ंग से पà¥à¤°à¤¸à¤µ में सहायता करना
शलà¥à¤¯ जनन या सीज़रियन सेकà¥à¤¶à¤¨ (शलà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¤µ कराना), अगर योनि के माधà¥à¤¯à¤® से पà¥à¤°à¤¸à¤µ कराने में खतरा हो, जैसे कि à¤à¥à¤°à¥‚ण या माता को जान का खतरा हो, जो सबूतों और दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¥‹à¤‚ से सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ होता है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ से पहले शलà¥à¤¯ जनन का विकलà¥à¤ª चà¥à¤¨à¤¾ जा सकता है या उसकी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की जा सकती है अथवा इंतजार की घड़ियों को ख़तà¥à¤® करने के विकलà¥à¤ª के रूप में पà¥à¤°à¤¸à¤µ के दौरान शलà¥à¤¯ जनन कराने का फैसला किया जा सकता है। सचà¥à¤šà¤¾ "आपातकालीन" शलà¥à¤¯ जनन, गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² के अलग होने या टूटने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में किया जाता है और बहà¥à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¸à¥‚तिक रोगियों या वैजाइनल बरà¥à¤¥ आफà¥à¤Ÿà¤° सीज़रियन सेकà¥à¤¶à¤¨ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ शलà¥à¤¯ जनन पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ योनिक पà¥à¤°à¤¸à¤µ (वीबीà¤à¤¸à¥€ (VBAC)) का विकलà¥à¤ª चà¥à¤¨à¤¨à¥‡ वाले रोगियों में यह अधिक आम है।
पà¥à¤°à¤¸à¤µ पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥
पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में à¤à¤• असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने वाली महिला उतनी जलà¥à¤¦à¥€ असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² से छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ ले सकती है जितनी जलà¥à¤¦à¥€ वह चिकितà¥à¤¸à¤¾ की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से सà¥à¤¥à¤¿à¤° हो जाती है और घर जाने का विकलà¥à¤ª चà¥à¤¨à¤¤à¥€ है, जो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¤µ होने के कà¥à¤› घंटे बाद का समय हो सकता है, हालांकि सहज योनिक पà¥à¤°à¤¸à¤µ (à¤à¤¸à¤µà¥€à¤¡à¥€ (SVD)) के बाद रूकने की औसत अवधि 1 से 2 दिन और शलà¥à¤¯ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¸à¤µ होने के बाद रूकने का औसत समय 3 से 4 दिन है। इस अवधि के दौरान रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ, आंतà¥à¤° और मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ के लिठमाता की निगरानी और बचà¥à¤šà¥‡ की देखà¤à¤¾à¤² की जाती है। शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर à¤à¥€ नज़र रखी जाती है।[2]
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